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Tuesday, 27 December 2016

अकेला

साहिल पे बैठा मैं,
समंदर की लहरें गिन रहा था,
घनघोर अँधेरा पसरा हुआ था,
अंदर और बाहर के हालात एक ही थे,
शायद वो रात,
अमावस की रात थी,
मेरा चाँद,
मुझसे दूर हो गया था,
पर आसमान में चमकते सितारे,
दिलासा दे रहे थे,
पैरो को छूकर जाने वाली,
लहरें भी कह रही थी,
तुम अकेले नहीं, 
हम सब तुम्हारे साथी हैं,
अब रोज साहिल में बैठ,
इन लहरों से बातें करना,
अच्छा लगता है,
वो तो दिल तोड़ गयी,
पर टूटे दिल को जुड़ने में,
वक़्त तो लगता है।

Monday, 26 December 2016

अभागिन

सूना है आँगन, सूने गलियारे,
सूनी है मन की सेज रे,
सुख गए हैं, आखों के आंसू,
हालत तो आकर देख रे,
चिट्ठी या तार, कुछ तो भिजवा दे,
लेने को मेरी टोह रे,
अब तो जिया न जाए अकेले,
तड़पे हैं जियरा रोज रे,
तड़प रही है रूह मेरी,
और कितना तड़पाओगे,
हर सुबह टूटता एक सपना,
कितने सपने दिखाओगे,
कर के सपने पूरे अपने,
जिस दिन वापस आओगे,
छोड़ गए थे जिस चौखट पे,
वही खड़ी पाओगे,
तुम कब आओगे, गले से लगाओगे,
पहना के मुझको, फूलों की माला,
कब अपने हाथों से सजाओगे ?

Monday, 14 November 2016

वो

बस एक नाम बन कर वो मेरी जिंदगी में आयी थी,
अब तो उनके जिक्र भर से होठों पे मुस्कान चली आती है।

Sunday, 13 November 2016

आदमी

निकट शाम को, गोधूलि बेला में,
यूँही पैदल निकल जाता हूँ,
जीवन की धुप-छाँव में,
ऐसे ही मन बहलाता हूँ,
सुख की परवाह नहीं मुझे,
दुखों की गिनती करता जाता हूँ,
मन की पीड़ा आंसू बन निकलते,
ऐसे ही मन बहलाता हूँ,
आदमी हूँ, कष्ट तो स्वाभाविक है,
उसे मुखौटा ओढ़ छुपाता हूँ,
धरा पर ऐसा मैं अकेला नहीं,
ऐसे ही मन बहलाता हूँ।

अब तो बस अरमान यही !!

पहले प्यार की बारिश थी, 
तन संग मन भी भीगा गयी,
आज तक अनजान रहा,
वो एहसास मन में जगा गयी,
जीवन तो मेरा कोरा था,
रंग प्यार के दिखा गयी,
चाहत के रंगों से रंगी,
होली मुझको सीखा गयी,
हर सफर की हमसफ़र बनो,
अब तो बस अरमान यही,
संग तेरे हूँ तो जीता हूँ,
बिन तेरे मुझमे प्राण नहीं।

क्यूँ आयी

छोटी अपनी प्रेम कहानी, दर्द अनेकों थमा गयी,
जो तुम आयी मेरी जिंदगी में तो क्यूँ आयी,
बेदर्द हवाएँ मुझे रुलाये, हर लम्हा तेरी याद दिलाये,
बिन तेरे एक पल भी मुझको, अब सुकून ना आये,
चेहरा तेरा आँखों में बसाये, यादों को दिल में सजाये,
जीए जा रहा हूँ तेरी चाहत को सीने से लगाए,
तनहा ही जी रहा था भला, दो पल के साथ को क्यूँ आयी,
जो तुम आयी मेरी जिंदगी में तो क्यूँ आयी।

Friday, 14 October 2016

हमसफ़र

हमने भी चाहा था की हमें प्यार हो जाए,
कोई एक, बस एक, मेरा संसार हो जाए,
तनहा सा लग रहा, ये जिंदगी का सफर,
इस सफर का कोई साझेदार हो जाए,
अब इंतजार है तो बस, उस हमसफ़र का,
जिसके साथ हर पल, एक त्यौहार हो जाए।

Wednesday, 3 August 2016

नादाँ दिल

नादाँ था दिल हमारा, पल पल वो कुछ सिख रही थी,
आँखें उनकी नम थी लेकिन, पलकें मेरी भीग रही थी।

तू ही संसार

खुद से पहले अनजान था, तुझमे ही खुद को पाया है,
धड़कन तो पहले ही थी, मेरी साँसों में तुझको समाया है,
अब तेरे बिन जी ना पाऊंगा, खुद को भी  भूल जाऊँगा,
तू है तो है जिंदगी,  तुझ बिन मैं तो मर जाऊँगा,
तेरे बिन जीना बेकार है, तू ही तो मेरा प्यार है,
मेरी चाहतों का तू ही तो, तू ही  पूरा संसार है,
बस तू ही मेरे प्यार है , अब तू ही तो मेरा यार है।





महबूबा

यूँ रोज, 
उनका मेरे सपनो में आना,
मेरे दिल के दरवाजे पे,
हलकी सी दस्तक देना,
कुछ तो है शायद,
उस कुछ को बहुत कुछ,
बनाने का दिल करता है,
उनसे मिलकर हाल-ए-दिल,
बताने का दिल करता है,
की अब उन्ही के साथ जीना,
और उन्ही पे मरने का दिल करता है।

Monday, 20 June 2016

मौसम की मार

पतझड़ की नहीं,
बस कुछ दिन पहले की बात है,
पेड़ों से हरियाली नदारद थी,
जमीन पे पड़े अधसूखे  पत्ते,
मौसम की मार को बयाँ कर रहे थे,
उनकी जीवन लीला अभी और थी,
वो असमय ही पेड़ों से गिर पड़े थे,

जिन तेज हवाओं में,
शाख और पत्तें साथ झूमा करते थे,
उनका साथ में लहलहाना भी,
एक मधुर संगीत की श्रिष्टि करता था,
शाख से जुदा क्या हुए,
पत्तो का कोई अस्तित्व ही न रहा,
तेज हवाओं की ठोकर ,
उन्हें जहाँ तहाँ बिखेर रही है,
अब  तो बस पत्तों की लाश बिछी है,
और रेगिस्तान सा माहौल है।




Thursday, 9 June 2016

फरियाद

मानसून की बेला है,
ये बूँदों का मेला है,
झमझम करते सावन ने,
तन को मेरे भिगो दिया,,
अतिरेक उल्लास ने फिर,
मन को मेरे भिगो दिया,
फिर बारिश घनघोर हुई,
धरती भी सराबोर हुई,
पर जहाँ है सुखा,
हर बच्चा भूखा,
सुखी माटी सुनी है,
हर राहत अनसुनी है,
एक बूँद के लिए, गयें हैं तरस,
ए बारिश जरा उधर भी बरस,

बारिश होगी, जीवन होगा,
हर समां रंगीन होगा,
हरियाली लहरायेगी,
कई मुखड़े खिल सी जायेगी,
नयी कोंपलें संग,
नयी जीवन की शुरुआत होगी,
सूखे डालों पर,
जब बूँदों की बरसात होगी,
हर कली को फूल और,
हर बाग़ को गुलशन कर जायेगी,
सावन की बूँदें जब,
प्यासी धरती से मिलने आएगी,
अब आँचल में बूँदें भर ले,
और याद उन्हें तू कर ले,
जिन्हे भूल गयी थी पिछले बरष,
ए बारिश जरा उधर भी बरस।

Friday, 27 May 2016

पर वो नहीं आई

"मेरे अनुज अभिषेक गांगुली को समर्पित रचना - "

निमिया तले, छाओं में बैठे,
पुरबइया बहे, मन कुछ कहे,
ना जाने वो कब आएगी,
इंतजार अब लम्बा हो रहा,
पलकें भी थक हार गयी,
पर वो नहीं आई,

पल पल लगे भारी,
आस अब भी बची,
अब तो आ जाओ,
कितने इम्तेहां लोगी हमारी,
कुछ गाने प्यार के,
कुछ वियोग के,
सब याद आ गए,
पर वो नहीं आई,

एक टीस सी उठी दिल में,
शायद न मिल पाने का दर्द,
अब मन कुछ कहे,
और दिल कहे कुछ और,
इसी उधेडबुन में फँसे रहे,
की तारे देने लगे दिखाई,
पर वो नहीं आई। 

Thursday, 26 May 2016

किताबेँ

किताबों से जो नाता था पुराना,
वो अब कट सा गया है,
वो नाता था अनोखा,
शायद अब भी कुछ रह सा गया है।
कभी हाथों में तो कभी सिरहाने तले,
कभी छाती पे तो कभी गोद में डेरा जमाते थे,
जुबां पर एक अलहदा जायका आता था,
जब कभी पन्नों को पलटाते थे।
नयी किताबों की खुशबू एक अलग एहसास था,
जब हम किताब से नाक को ढके पूरी सांस अंदर भरते थे,
अलग स्नेह होता था तब,
जब हमारे हस्ताक्षर पहले पन्ने पे हुआ करते थे।
अब नया है माहौल और नयी है जमीन,
जहाँ होता था किताबों का ढेर, अब होती है मशीन,
अब न हाथों में , ना सिरहाने तले,
अब तो वो अलमारियों की तख्तों पे सजती है,
महीनो तक अब मुलाकातें नहीं होती,
बड़ी हसरत से वो तकती है।
वो दौर ही अलग था,
जब किताबों से सूखे फूलों की खुशबू आती थी,
उन्हें गिराने और उठाने में कितने रिश्ते बनते थे,
अब वो दौर कहाँ,
अब तो वो अलमारियों की तख्तों पे सजती है,
महीनो तक अब मुलाकातें नहीं होती,
बड़ी हसरत से वो तकती है।

जान

आज वो दिन था, और वो ठीक मेरे सामने थी,
आज पहली बार वो मेरे इतने करीब थी,
इतनी करीब की उसकी साँसे भी महसूस कर रहा था,,
नजर थी तो बस उसके चेहरे पर, 
सब कुछ साफ़ नजर आ रहा था,
मानो पहली बार उसकी नजर से मेरी नजर टकराई हो,
उसके चेहरे की मासूमियत, उसके होठों पे बसी मीठी मुस्कान,
आँखों में छुपे अनगिनत सवाल, मन में उठी कई उम्मीदें ,
पल पल बदलते गालों के रंग, कभी सुर्ख लाल तो कभी मद्धिम,
उसकी धड़कन का तेज होना, वो इन्तजार में ठहरी पलकें,
सब कुछ नजर आ रहा था, समझ आ रहा था पर,
दो बोल बोलने को जबान साथ नहीं दे रहे थे,
शायद कोई डर था, इनकार का डर था,
काश की वो मेरे मन की बात समझ जाती,
काश की वो मुझे अपने बाहों में ले लेती,
काश की वो ही कुछ कह देती,
काश की वो मुझे इस उलझन से बचा लेती,
काश की वो मेरी कमजोरी को अपनी ताकत बना लेती,
मन इसी उधेडबुन में फंसा जा रहा था,
की होठों पे एक छुअन का एहसास हुआ,
देखा तो आँखों में आंसू थे, दोनों के,
अब सारी उलझन दूर थी, आसमान साफ़ हो गया था,
मेरी दुनिया मेरी बाहों में थी,
वो पल, वो एहसास , इस दुनिया से परे था,
वो अनन्त सुख था,
वो सुख था, किसी की दिल में अपनी जगह बनाने का,
एक इंसान से किसी और की जान बन जाने का।

Wednesday, 25 May 2016

वो साल

वो साल अनोखा था,
एक हवा का झोका था,
थोड़ी गम की बारिश थी,
खुशियों का झरोखा था,

कुछ पुराना पीछे छूट गया,
कुछ नयी हाथों का सहारा मिला,
अच्छी यादों को मन में सजाके,
भूल गया हर शिकवा-गिला,

अब नए साल के नए रंग में,
हम घुल-मिलकर रम जाएंगे,
उम्मीदों-आशाओं का आँगन होगा,
हँसते-गाते हम यूँ ही जीते जाएंगे। 

वो कल

चल वापस वहीँ, जहा सुनहरे पल छोड़ आये थे,
जहाँ हमने सुन्दर भविष्य के सपने सजाये थे,

वो चिढ़ाना , वो भागना, वो प्यार से मनाना,
वो बाहों में बाहें और सडकों का किनारा,
वो घंटो तक बातें और दूर तक जाना,
वो कल था, मधुर था, प्यारा था, जीवन हमारा,

वो सर्दी की शामें और चोरी छिपे मिलना,
वो बारिश का मौसम और बचने को भागना,
वो पानी से सराबोर हवा का तन को छूना,
वो सर्द से काँपना और एक दूजे से लिपटना,

वो गलियाँ, वो सीढ़ियाँ , वो नदिया किनारा,
वो पेड़, वो छाँव, वो तने का सहारा,
वो हंसी, वो ख़ुशी, वो आँखों का इशारा,
चल लौट चले उस पल में, जो पल था हमारा।  

मेरी मोहब्बत

कभी छलके आंसू, तो कभी छलके जाम,
कभी याद आई तू, तो कभी भुला अपना नाम,
मेरे लिए तो तू ही मेरी जिंदगी थी,
जीने का मकसद, थी तू खुदा का पैगाम,

है अब तू मुझसे बेखबर, कैसी ये तेरी रुसवाई है,
दिल में तू थी पहले, अब वहां तेरी परछाई है,
चली गयी है तू, मेरी दुनिया से परे,
पर ये दिल नहीं मानता, की तू हरजाई है,

ढूँढ लिया होगा तूने नया कारवां,
मैं अब भी तुझे ही सोचता हूँ,
मिल गया होगा तुझे, किसी और के कदमों का सहारा,
मैं आज भी रेत पे, तेरे क़दमों के निशाँ खोजता हूँ।

जिन्दा हूँ कहीं !!

कहीं दूर, बहुत दूर,
अंजानी राहो में भटकते हुए,
तुम बहुत याद आये,
तुम बहुत याद आये।



कहीं दूर, बहुत दूर,
अँधेरे के आँचल में,
सन्नाटे के बीच,
जाने पहचाने चेहरों से दूर,
ठुकराये हुए, हालात से मजबूर,
अब रोया  भी न जाए,
अब रोया  भी न जाए।



दोष किसका था,
अब याद नहीं,
बस याद है तो इतना,
तुम अब साथ नहीं,
एक दिल था कहीं अंदर,
अब सैकड़ों हैं पर,
टूटे दिल का हर टुकड़ा,
अब भी धड़कता है,
सदा यही कहता है,
तुम बिन जिया न जाए,
तुम बिन जिया न जाए।



बहती हवाओं की सरसराहट,
बारिश की हर एक बूँद,
तेरी छुअन का एहसास,
पास ना होने का ख्याल,
हमें हर पल सताए,
हमें हर पल सताए।



सूनी रातों के बाहों में सिमटे,
तेरी यादों के साये,
कभी जी भर हंसाएं,
तो कभी हृदय से रुलाये,
मुस्काता चेहरा, प्यारी बातें,
वो झगड़ें, वो दुलार,
तड़पाये मुझे दिन-रात,
अरज है अब इतनी भगवन से,
हमें जल्दी पास बुलाये,
हमें जल्दी पास बुलाये। 

अपने

नदियाँ बहती जाती कल कल, दरिया उनकी मंजिल है,
साथ न छोड़े मंजिल तक जो, वो नदियाँ की साहिल है,
एक-दूजे के प्यार में पड़के, भूल ना जाना अपनों को,
वे अपने ही हैं जिन्होंने, बनाया तुम्हे इस काबिल है।  

खुशियाँ

सहरा में तब बारिश होगी,
 रेत में भी तब फूल खिलेंगे,
बंजर माटी का सूनापन,
तब हरियाली में बदलेगा,
जब दो प्रेमी,
प्यार में डूबे,
सूली चढ़ने को आतुर हो,
और ज़माना,
अहम को छोड़,
उनकी खुशियाँ चाहेंगे।  

जिंदगी Returns

मौत तो कबसे साथ खड़ी थी,
आज जिंदगी हमसे टकड़ा गयी है,

हम तो मायुश थे इस जनम से,
वजह जीने की पकड़ा गयी है,

देवी-परियों की बातें सुनी थी,

एक झलक हमको दिखला गयी है,
उनकी गलियों से होगा अब गुजरना,
ये मतलब हमको सिखला गयी है,

दिल है की नहीं, भूल ही गए थे,

आज धड़का तो याद आ गया है,
ख्वाबों में होगा अब उनसे मिलना,
जीने का स्वाद याद आ गया है,


एक झलक ही देखा था बस उनको,

मेरे दिल में वो घर कर गयी है,
मौत तो कबसे साथ खड़ी थी,
आज जिंदगी हमसे टकड़ा गयी है।

बहुत याद आते हो

बीत गए कितने ही मौसम,बीत गए वो अल्हड़पन के दिन,
सोचा न था, कैसे जी पायेंगे हम तुम्हारे बिन,
प्यार से जुड़ी हर बात अब तो बेमानी लगती है,
तुझसे जुड़ी हर याद अब तो अनजानी लगती है,
टूट चूका हूँ, बदल सा गया हूँ, ऐसा मैं पहले ना था,
पर ..... तुम अब भी बहुत याद आते हो,

वो छोटी छोटी बातों पे हमारा झगड़ना,
कभी एक दूजे से रूठकर मुंह फुलाकर बैठना,
कभी तेरी हंसी उड़ाई तो,
मेरे बाहों पे हलके हलके मुक्के बरसाना,
अब तो वो यादें भी धूमिल हो चुकी है,
पर .... तुम अब भी बहुत याद आते हो,

एक दूजे को देखते ही, ख़ुशी से हमारे चेहरे का चमकना,
मौका मिलते ही, एक दूजे के बाहों में खो जाना,
कभी जोरो की भूख लगी हो, और गोद में सर रखने का मौका मिला,
तो बिन खाए ही, मीठी सी नींद में खो जाना,
वो बातें, अब तो बस कहानी सी लगती है,

रातो को जब भी आँखें बंद करूँ, तो तेरा ही चेहरा नजर आता था,
सुबह को जब आँखें खोलू तो तेरा ही चेहरा देखने का मन करता था,
अब तो नींद भी हमसे दगा कर रही है, खुली आँखों में रातें गुजर रही है,
जिन आँखों में पूरी रात खो जाती थी, उनमे अब सबेरा का एहसास तक नहीं,
पर ... तुम अब भी बहुत याद आते हो,

खुश हूँ बहुत मैं अब तो, अपनी छोटी सी दुनिया में,
खुश होगी तुम भी कहीं, इसी छोटी से दुनिया में,
तुम हो ना पाई मेरी, मैं ना हो सका तेरा,
ये एहसास अब किसी कोने में दफन हो चूका है,
पर ... तुम अब भी बहुत याद आते हो।।

इश्क

सूरज डूबा चाँद है निकला, प्यारी सी चाँदनी छाई है,
दिल में अजब सी टीस है उठती, कैसी ये खुमारी छाई है,
मेरे आँखों में अब तो, ख्वाब तेरे ही बसते है,
मेरे दिल में है बस तू ही, दिल में तेरे हम रहते है।

कुहासा और चाय

कुहासे में लिपटी वो सर्दी की सुबह,
कम्बल के अन्दर नाक तक दुबक कर,
खिड़की से सबेरे का अँधेरा देखना,
बहुत कोशिश करने पर भी,
सब कुछ धुंधला धुंधला दिखना,
एक अजीब से सिहरन का एहसास,
और ठण्ड के मारे कम्बल में दुबके रहना,
माँ के हाथ की बनी चाय और,
पकौरे की प्लेट का कमरे में आना,
चाय  की एक चुस्की के बाद,
बगल की टेबल में रखना,
ये सब बहुत याद आते है,
जब नए शहर के नयी सुबह में,
बेकरी पे चाय पीने जाते है।

पर्वत-सागर

पर्वत की उंचाई से ज्यादा,
सागर की गहराई से ज्यादा,
मैंने इक से प्यार किया,
वो तो दिल को तोड़ गयी,
सागर में पर्वत छोड़ गयी,
अब ना तो कोई पर्वत है,
ना ही कोई सागर है,
बस प्यार कहीं पे जिन्दा है,
मन के किसी एक कोने में,
और याद बची है साथ मेरे,
काम आती है रोने मे।

हमसफ़र

कदम कदम पे तेरे साथ चला हूँ , अगले कदम पे भी मेरा साथ होगा।
खुशियाँ दूंगा इतनी की तेरे आँखों में नमी नहीं, मेरे प्यार का एहसास होगा।
तेरी मोहब्बत से चलती है मेरी साँसे, मुझपे बस तेरा ही अधिकार है।
तुझमे ही जीता आया हूँ, तुझमे जीता जाऊँगा,
क्यूंकि तू ही मेरा संसार है,... तू ही मेरा संसार है… 

वो बचपन

कभी खेल के मैदान में गिरते,
कभी पेड़ों कि उंचाईओं को नापते,
कभी होती साइकिल कि रेसिंग,
तो कभी बारिश में भीग के कांपते,
उन सब का अपना मजा था,
वो हमारा बचपन था।

सुबह का उठना बड़ा कठिन था,
बाकी दिन के हम राजा होते थे,
परीक्षा के नाम पे रातों को जागते,
छुट्टियों में दिन भर सोते थे,
चिंता से परे स्वर्ग सा जीवन था,
वो हमारा बचपन था।

दोस्तों के लिए हरदम तैयार,
नादानियों का था वो संसार,
कभी मार खा के रोते थे,
कभी मार के खुश होते थे,
वो अलग ही जज्बा था,
वो हमारा बचपन था।

अब तो कभी छत पे,
कभी बरामदे में,
तो कभी चाय कि दूकान पे,
हमारा खाली वक़्त गुजरता है,
गुजरे दिनों कि याद,
हमेशा हमसे कहता है,
वक़्त तो वक़्त है,
वो तो ऐसे ही बदलता है,
अब जो हमारी मुस्कुराहट है,
उन दिनों का हमारा चहकना  था,
वो हमारा बचपन था।।

अँधेरा

होता न अँधेरा कल अगर, फिर रोशनी की क्या पहचान थी,
जाना हमने उनको आज, कल तक जो हमसे अनजान थी,
वो अँधेरा ही तो था, जिसने हमें रोशनी का मतलब समझाया है,
अँधेरे का तो साथ है पुराना, उजियारे को तो अभी अभी अपनाया है,

वापस

चली गयी दूर मुझसे तू, दिल को तोड़ कर मेरे,
आज फिर सामने है तू, मगर दिल में है अँधेरे,
धड़कन रुक गयी मेरी, लगा कुछ चुभ गया दिल में,
आँखों में आंसू थे मेरे, बह गए आँखों से तेरे,

परास्त

प्यार में हारे प्रेमी की होती यही पहचान है,
जाम होती है भरी हुयी, होता खाली इंसान है,
बर्बादी को तो गले लगाया, मौत का बस इन्तजार है,
मरे भी लावारिसो जैसे, इनकी तो ऐसी दास्तान है,

बस.... प्यार हो गया

नजर जिसको कहीं देखे, तेरा ही चेहरा लगता है,
हमारे चारो तरफ अब तो, तेरा ही पहरा लगता है,
झलक देखी थी पल भर को, हंसी को भूल ना पाया,
मैं तो प्यार कर बैठा हूँ, अब तो ऐसा लगता है !

मुखौटा

चुपके से आंसू का कतरा बह ही गया,
अपने ही अंदाज में वो तो कुछ कह ही गया,
चट्टान का मुखौटा ओढ़ रखा था मैंने,
वो पत्थर भी  आज ढह ही गया !

जज्बात

दिखा के प्यार के कईयों सावन, वो तो दिल को तोड़ गए,
मंजिल आने से पहले ही, मझधार में ही मुह मोड़ गए,
आज भी उनकी तस्वीर को देख, बरबस आंसू निकल आते है,
होते है कुछ जज्बात ही ऐसे, जो आँखों से यूँही बह जाते है !

तनहाई की वो शाम

फिर वही तनहाई, ये शाम भी साथ लेकर आई,
तड़प रहा था दिल मेरा, पर मेरी आँखे भर आई,
वो शाम अब भी तेरा साथ पाने को बेकरार है,
उसे भी पता है की मुझे किस कदर तुझसे प्यार है,

आशिक

शीशा हूँ मैं, देख लो खुदको, अक्स नजर आ जाएगा,
कुदरत का करिश्मा हो , यकीन आपको हो जाएगा,
यूँ तो हजारो आशिक है आप पे दिल लुटाने वाले,
आज ये आशिक अपनी जां लुटा जाएगा,
बस एक बार हमें आजमां कर देख लो  ,
आपके रोम रोम को हमसे इश्क हो जाएगा !

बेजान दिल

तेरा हँसना, तेरा इठलाना, चुप होकर फिर धीरे से तेरा मुस्काना,
कभी पलकों के साए में, अपनी आँखों की शरारतों को छुपाना,
बहुत याद आता है, मेरा एकटक सिर्फ तुझे ही निहारना,

वो बाँहों में बाँहे, घंटो तक नंगे पाँव रेत पे टहलना,
कितनी खूबसूरत होती थी वो शाम, और साथ में सूरज का ढलना,
तड़पाती है बहुत मुझको, तेरी कमी का खलना,

उदास होती थी तू, फिर मेरे कंधे पे सर रख के तेरा रोना,
खुद को भुलाकर, मेरा, तेरे दर्द के आंसुओ में खोना,
सिमटे होते थे जहां एक दूजे में, सूना पड़ गया घर का वो कोना,

दर्द इतना ही बढ़ गया था, की ये नाजुक दिल सह ना पाया,
हँसना सिखा था तेरे संग, बिन तेरे मुझे जीना भी ना आया,
जिंदगी की धुप में तनहा ही जला था, मुझे कभी चैन ना आया,
लकड़ियों की तपती सेज पे ही इस बेजान दिल को आराम आया,

महबूबा

मोहब्बत में तेरी हम तो, खुदा को भूल जायेंगे,
तेरी पलकों के साए में , जहाँ अपनी बनायेंगे,
मिली है आज तू मुझको, तुझपे हम जाँ लुटाएँगे,
हँसी अपने लबों की अब, तेरे लब पे सजायेंगे !

टूटा मन

कोई न रहा साथी, अब कोई हमराज नहीं,
बेरहमी से तोड़ गए मुझे, पर कोई ऐतराज नहीं,
इंसान हूँ मैं, बहुत सारी मुझमे कमियाँ है,
टूटे को फिर से तोड़कर , हंसने वाली तो ये दुनिया है,
अकेले में, तन्हाइयों में, खुद ही खुद के साथ होंगे,
अब खुद तक ही सिमित, मेरे खुद के जज्बात होंगे,

रिश्ते

ये जो रिश्ते है
दुनिया के बाज़ार में सबसे सस्ते है
दिल को तोड़ के प्यार से
ये सब हँसते है ,

रिश्ते थे जो खून के
उन्होंने ही पराया किया
औरो से ना कोई सिकवा
जिन्होंने मुझसे साया किया,

पत्थर नहीं हूँ इंसान हूँ मैं
मुझे भी दुःख होता है
मैं भी हँसता हूँ
जब मुझे सुख होता है,

दुनिया में अकेले आते है
सबको फिर अकेले ही जाना है
जो रिश्ते छुट गए पीछे
उनपे अब क्या पछताना है,

रब ने रोता हुआ भेजा हमको
अब हँसते हुए जाना है
जो रिश्ते छुट गए पीछे
उनपे अब क्या पछताना है!

मौन सिपाही

जिंदगी का किनारा
सुनसान रास्ता
और उस रास्ते का
एक अकेला राही
प्रतीत होता है ऐसा
इस मौन दुनिया का
रह गया मैं अकेला
एक मौन सिपाही !

बुने थे ढेरों सपने
कहाँ रहे वो अपने
किये थे जितने कर्म
लगे सब संगीन जुर्म
अपने हाथों मैंने
अपनी लुटिया डुबाई
बीच मझधार में
कभी डूबी कभी उतराई
गम का रहा हमेशा साथ
खुशियों के चौखट पार
करने की मानो थी मनाही
इस मौन दुनिया का
रह गया मैं अकेला
एक मौन सिपाही !

हिम्मत टूट गयी
रिश्ते रूठ गए
आँखों में चुभने वाले
किस्से छुट गए
जिनसे थी साथ
की उम्मीद
उन्होंने ही मेरे
भरोसे की दीवार ढाही
इस मौन दुनिया का
रह गया मैं अकेला
एक मौन सिपाही !

तेरी याद

दिल में कांटो सी चुभती है,
जब तेरी याद आती है,
आँखें बंद करता हू,
 उनमे तू मुस्कुराती है,

इसे दास्ताँ-ऐ- मोहब्बत कहें ,
या एक हारे दिल की कहानी,
दिल के हो गए टुकरे टुकरे ,
पर आँखों में ना आया पानी,

अब तो तेरी याद भी,
 रह रह कर आती है,
दिल के सूनेपन को,
 कुछ और बढा जाती है,

पहले मोहब्बत में तारे गिना करते थे,
पर आज ये मंजर है,
भुलाने को तुझे , पीना परा मुझे,
पर अब...तेरी याद पीने के बाद आती है..

हमारी शाम

नगमे अपनी मोहब्ब्बत के
आज भी गुनगुनाता हूँ ,
अपनी हर शाम
तेरी कब्र पे ही बिताता हूँ,

लोग कहते है की
मैं पागल हो गया हूँ,
तेरी यादों के साए में
कहीं खो गया हूँ,

वादा लिया था तुमने की
तेरी कोई शाम न बीते तनहा,
मैं तो अपनी जान को दिया
वादा निभाता हूँ !

सूखे पत्ते

कुछ पत्ते सुख से गए थे , कुछ में नमी अभी बची थी,
कुछ परत दर परत जमीन पे परे थे,
मानो एक सुर्ख सी सेज सजी हो,
झील की गहराई सा सन्नाटा पसरा हुआ था चहु ओर,
मानो किसी आपात स्थिति से लरने को निःशब्द खरे थे.


टूटकर शाखों से जब जमीन पे ये गिरे थे,
अपने से टूट के अपनों से जब मिले थे,
एक अनोखी सी दर्द का एहसास,
तो कभी ख़ुशी से दिल खिले थे.

जो परा रहा जमीन पे, सबके भार को उठाये,
आज अपने साथियों से बिदाई ले रहा है,
अपने कंधे की जिम्मेदारी किसी और पे सजाके,
मिटटी का था वो जन्मा, आज मिटटी में मिल रहा है.

फिर, सरसराती हुयी हवा ने मंजर बदल दिया,
जो शाखों पे सजे थे कभी, अब जमीन पे परे है,
जो जमीन पे परे थे, अपनी जननी के आँचल तले,
वे भी टूट कर यत्र तत्र बिखरे परे है.

अब जब बसंत आएगी ..  नयी उमंगो के साथ,
नए कोपले फूटेगी, फिर हरियाली  का बसेरा होगा,
सूखे  पत्तो के जगह, हरी हरी घास लहलहायेंगी,
हर्षित होंगे सारे मन, फिर खुशियाली का सबेरा होगा. 

बंधन

मेरी बहन "नीमा" को मेरी तरफ से.......




बहना ओ बहना, मेरी प्यारी सी बहना,
मेरे लिए तू सदा, ऐसी ही रहना,
आये गर दिल में कोई भी बात,
भैया से अपने तू हक से ही कहना,

बंधन जो तुने बाँधा, राखी से अपने,
दिल में छुपा के सदा साथ रखूँगा,
मिला है जो स्नेह, मुझे बातो में तेरे,
बदले में उसके अपना प्यार मैं दूंगा,

सुनी कलाई जब, मैंने देखी थी अपनी,
आंसुओ को बड़ी मुश्किल से रोका था हमने,
आते है अब भी आंसू, पर वो होते है ख़ुशी के,
बहना मिलेगी ऐसी, ना कभी देखे थे सपने,

एक भाई को बहन का प्यार दिलाया है रबने,
बहना है इतनी प्यारी, जिसे चाह है सबने,

तुझसे है ये वादा मेरा,
तेरी ख़ुशी के लिए हर गम सहूंगा,
आये कभी न तेरे आँखों में आंसू,
तुझको सदा मैं हंसाता रहूँगा,

किस्मत से है तू मिली,
अब तुझसे बस यही है कहना,
बहना ओ  बहना, मेरी प्यारी सी बहना,
मेरे लिए तू सदा ऐसी ही रहना......

मोहब्बत

नमन करता हूँ भगवन को, जिसने इंसान बनाया,
जिनके दिल में ये मोहब्बत, अन्दर तक है समाया,
मोहब्बत होती न दुनिया में, तो इंसान क्या करता,
क्यूँ जीता वो दुनिया में, वो किसके लिए मरता........

दफ़न

टूटे शीशे के टुकड़ो सा, दिल मेरा अब तो लगता है,
जो दर्द हुआ था दिल को मेरे, वैसा दर्द कहाँ कोई सहता है,
मोहब्बत की वो देवी थी, क्यूँ दुनिया को वो छोड़ गयी,
उसका प्यार ही बचा है अब तो, किसी कोने में दफ़न सा रहता है!

पत्थर का दर्द

ना ये दुनिया होती, ना तू होती.. ना मैं होता,
ना ये प्यार होता, ना मैं सपनो में  खोता,
मंजिलों की तरफ कदम तो बढे हजार
फेल ही होता रहा, मैं पास ना हुआ..
खाता तो रहा जिंदगी भर मैं,
पर प्यार से दो निवाला भी रास ना हुआ,
ममता, प्यार, रिश्ते सबसे सिर्फ धोखा ही मिला,
फिर भी सिर्फ पत्थर बना, लाश ना हुआ,
इतना तड़पाया तुने अपने प्यार में मुझे,
की तेरे जाने पर भी दर्द का अहसास ना हुआ....

जीवन का अँधेरा

एक अँधेरा सा कमरा, चारो ओर फैली है तन्हाई,
छूप गयी है कही, आज मुझसे मेरी परछाई,
खुली खिड़की से आई ठंडी हवा के झोको ने जब मुझे थपथपाया,
महसूस हुआ की मैं अभी जिन्दा हूँ, बरबस मेरी आँखे भर आई,
उदासीन नज़ारे तैरते है हर पल, मेरी आँखों के सामने,
हाथ तो उठे थे अनेको, पर किसी में हमदर्दी न नजर आई,
बेबस , लाचार , बिलकुल असहाय हो गया हूँ,
अपनी नजरो में भी नीचे गिर गया हूँ,
रौशनी की किरने, चुभती है अब सीने में,
वो रोशनी ही थी, जो जीवन में अँधेरा कर गयी!

आखिर !!

बोलते थे खुद को, ये मोहब्बत न हमको होगा,
कच्ची उमर में जो होता है, वो अहसास अब ना होगा,
झूठे हो गए सारे वादे किये  थे हमने कभी खुद से,
पहली नजर पड़ी थी मेरी उसपे जबसे,
झुकी हुयी पलके, होठो पे हलकी सी मुस्कान,
बस एक झलक में निकल गयी थी मेरी जान,
मेरी हर एक धड़कन आज उसका है दीवाना,
आज मेरी है वो, जिसके पीछे था सारा ज़माना !

मयखाना

तेरे मेरे दुःख का साथी एक यही मयखाना है,
गाली देती, फिर भी आती, ऐसा तो ये जमाना है,
हिन्दू मुस्लिम कोई न रहता, जब जाम गले से उतरता है,
भाई तब भाई का ना रहता, दुश्मन, दुश्मन का दिवाना है,

ये मोहब्बत

मेरे दिल में ये मोहब्बत तुने ही जगाया है,
लगे सिर्फ तू ही अब मेरी, ये दुनिया तो पराया है,
सच को जान लिया मैंने, अब ना मरने से डरता हूँ,
की तू मुझसे प्यार करती है, मैं तुझसे प्यार करता हूँ!

मीठा सा दर्द

मीठा सा दर्द जगा दिल में, लगा कुछ खो गया मुझ से,
झलक भर देख कर मुझको, मोहब्बत हो गयी तुझ से,
नींद आती ना रातो को, ना दिन को चैन रहता है,
वहां तू प्यार से अनजान, यहाँ मेरा दिल तड़पता है!

इल्जाम

तेरे मेरे प्यार के किस्से को किया है तुने बदनाम,
तोडा है दिल तेरा मैंने, मुझपे आया है इल्जाम,
थकते थे न जो होठ कभी लेते हुए मेरे नाम,
 दिल को दुखाया है आज उसी ने सरेआम,
आगोश में तेरे बीते थे जो, आई है वो खाली शाम,
हाथो में कभी हाथ होते थे, आज उन्ही ने पकडे है जाम,
तेरे लिए दिल से मेरे,अब भी निकलते है यही पैगाम,
कल भी होठो पे तेरा ही नाम था, आज भी आया है तेरा ही नाम,

पैसे की दुनिया

पैसे की ये कैसी दुनिया है
हर इंसान यहाँ एक बनिया है

कोई नाम को अपने बेच रहा
कोई काम को अपने बेच रहा
खरीददार यहाँ पे दुनिया है
और मोल लगाता बनिया है

गुण को जो अपने बेच सका
वही नाम यहाँ कमाता है
बाकी है खोटा सिक्का
कचरे में चला जाता है

खुद को बेचके इंसान
खुदके सपने खरीदता है
जो बिक गया समूल
खुद का उसका क्या बचता है??

पैसे की ये कैसी दुनिया है
हर इंसान यहाँ एक बनिया है !!

खुद को ही खुदा माना

रोते हुए इस दुनिया में आये थे,
अब हंसते हुए जाना है,
खुद से ही है प्यार मुझे,
खुद को ही खुदा माना है!

हाथों की लकीरें कुछ नहीं कहती ,
हाथ ही मेरी हकीकत है,
साथ मिलता है सिर्फ अपनों का,
बाकी दुनिया एक शरारत है!

मिट्टी के है हम बने हुए ,
मिट्टी में ही मिल जाना है,
खुद से ही है प्यार मुझे ,
खुद को ही खुदा माना है!

तेरी जुदाई

टूट गए सारे सपने, वो जो हमारे थे,
याद आते है वो लम्हे, जो हमने मिलके सँवारे थे,

क्यूँ छोर गयी मुझे, इस बेबसी सी तन्हाई में,
तिल तिल के मर रहा हूँ, मैं तेरी जुदाई में,

आज नंगे पाँव, चला आया हूँ बहुत दूर,
की भूल गया हूँ, चप्पल कहाँ उतारे थे,

भीगी पलकों को उठाके देख सकता हूँ तुम्हे,
तुम चमकती हो वहां, जहाँ कभी सितारे थे !!

पहला प्यार

पहले प्यार की पहली महक हो तुम ,
चाहत है दिल में,पर तुम हो गयी हो गम,
तस्वीर दिल में अभी भी बसी है,
ख़ुशी में तुम्हारी अब मेरी ख़ुशी है

इजहार मेरा, तुम्हे सही ना लगा था,
कितनी ही राते तेरी यादो में जगा था,
तुम थ पराई, ना समझी मुझे तुम,
प्यार था अपना,वही अपना सगा था

नादाँ थी तुम, ये समझ न सका था,
इन्तेजार में तेरे, उस मोर पे रुका था,
मुस्कुराता हूँ आज,तुझे मैं याद करके,
खुश हूँ कहीं मैं, तुझे प्यार करके

पाने की तुझे, कभी कोशिश न की मैंने,
जो होता रहा, उसे हंस के देखा मैंने,
पा ना सका तुझे, इसका मुझे गम नहीं,
खयालो में है तू साथ, यही मेरे लिए कम नहीं !!